रोती आंखों में लौटी मुस्कान: मानवता की मिसाल बनी उनारसीकलां पुलिस
05 वर्षीय मूक नाबालिग बालिका को 02 घंटे में सकुशल परिजनों से मिलाया
मानवीय संवेदना, कर्तव्यनिष्ठा एवं पुलिस–जन सहयोग की मिसाल प्रस्तुत करते हुए थाना उनारसीकलां पुलिस द्वारा एक 05 वर्षीय मूक बालिका को मात्र 02 घंटे के भीतर सकुशल उसके परिजनों के सुपुर्द किया गया।दिनांक 19.01.2026 को कस्बा भ्रमण के दौरान पुलिस को सूचना प्राप्त हुई कि कल्याण रावजी मंदिर के समीप सड़क पर एक छोटी बालिका रोती हुई एवं असहाय अवस्था में घूम रही है, जो बोलने में असमर्थ प्रतीत हो रही है। सूचना मिलते ही उनारसीकलां पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और बालिका को सुरक्षित अपनी अभिरक्षा में लिया। बालिका अत्यंत भयभीत थी तथा नाम-पता बताने में असमर्थ होने के कारण लगातार रो रही थी।
मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को दृष्टिगत रखते हुए तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया। पुलिस अधीक्षक विदिशा श्री रोहित काशवानी के द्वारा प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए शीघ्र वैधानिक एवं मानवीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ प्रशांत चौबे एवं एसडीओपी लटेरी श्री अमरेश बोहरे के मार्गदर्शन में उनारसीकलां पुलिस टीम द्वारा बालिका को ढांढस बंधाते हुए एवं साथ लेकर आसपास के ग्रामों एवं मोहल्लों में सतत खोजबीन की गई।
लगभग 02 घंटे की अथक कोशिशों के पश्चात एक मोहल्ले में परिजनों की पहचान सुनिश्चित हुई, जहां मौके पर मौजूद गवाहों के समक्ष बालिका को उसकी माता के सुपुर्द किया गया। परिजनों द्वारा बताया गया कि बालिका जन्म से मूक है। अपनी पुत्री को सकुशल पाकर परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक उठे तथा उन्होंने विदिशा पुलिस का आभार व्यक्त किया।
उनारसीकलां पुलिस का यह कार्य समाज के प्रति पुलिस की संवेदनशीलता, सजगता एवं मानवता के प्रति प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से दर्शाता है।
सराहनीय भूमिका:
इस सराहनीय एवं मानवीय कार्य में थाना प्रभारी उनि गोसिया सुल्तान, प्र.आर. कुलदीप सिंह चंदेल, प्र.आर. रविकांत राव, एवं आर. मोहित की महत्वपूर्ण भूमिका रही

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