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इस्कॉन उज्जैन के अध्यक्ष श्रीपाद बृजेंद्र कृष्ण प्रभु ने इफेक्टिव वेज ऑफ स्ट्रेस मैनेजमेंट पर सरकारी अधिकारियों को बताएं उपाय

 इस्कॉन उज्जैन के अध्यक्ष श्रीपाद बृजेंद्र कृष्ण प्रभु को विदिशा स्थित न्यू कलेक्टर ऑफिसकार्यक्रम में आमंत्रित किया गया। कार्यशाला में कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता अपर कलेक्टर श्नल कुमार डामोर समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।  कलेक्ट्रेट के बेतवा सभागार में आयोजित कार्यक्रम मुख्य विषय तनाव प्रबंधन के प्रभावशाली मार्ग पर अपना व्याख्यान दिया।



                श्रीपाद बृजेंद्र कृष्ण प्रभु ने शुरू में अपनी शैक्षणिक योग्यता ओं पर प्रकाश डाला।  उसके उपरांत इस्कॉन में ब्रह्मचारी आश्रम में पूर्ण जीवन को समर्पित करने पर केंद्र जानकारी साझा की है।

                उन्होंने कहा कि हमारा मन कई बार नकारात्मक विचारों से विचलित हो जाता है- कैसे एक अस्वस्थ मन हमें अनुचित प्रतिस्पर्धा में लगा देता हैमिथ्या अहंकार द्वारा हम कई बात गलत निर्णय ले लेते है।जिससे हम गलत निर्णय ले लेते हैं यदी हम मन के ढांचे को सुधार ले तो हम प्रसन्नता से अपना जीवन जी सकते हैं। मन हमारा सबसे बड़ा शत्रु भी होता है एवं सबसे बड़ा मित्र भी होता है अगर हम मन का प्रयोग सही तरह से करना सीख गए तो हम बहुत सुकूनशांति एवं आनंद से जीवन जी सकते है।शरीर के साथ-साथ में हमें अपने मन का भी ध्यान रखना होता है अगर शरीर स्वस्थ है एवं मन संतुष्ट है तो हम जीवन में किसी भी लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं एवं सभी चुनौतियों का सामना आसानी से कर सकते हैं।

    नकारात्मक विचार हमारी ऊर्जा को कम करते हैंतथा हमारे कार्य करने की पूर्ण क्षमता को भी कम कर देते हैंजीवन में हम शरीर पर तो ध्यान देते हैं लेकिन मन कभी-कभी अस्वस्थ रहता हैएक स्वस्थ मन एवं संतोषस्वस्थ जीवन का अभिन्न अंग है

शरीर स्वस्थ मन संतुष्ट प्रसन्न जीवन

 

                इस सूत्र पर प्रकाश डालते हुए बताया गया है।मानसिक संतुलन हर क्षेत्र में आवश्यक है अगर हम अपने अनों व बुरी आदतों पर कार्य करते है और हम अपने मानसिक ढांचे को सुधार लेते हैं तो हम बहुत ही ज्यादा ऊर्जा के साथ कार्य कर सकते हैं

                उन्होंने बताया की हम अपने परिवार के साथ ज्यादा समय अगर ना भी बिता पाए तो जब भी हम परिवार के साथ रहे एक अच्छा व मधुर समय साथ बिताए व रिश्ते में सामंजस्य को बढाएप्रेमसम्मानविश्वास यह ऐसी चीज है कि हम अपनी व्यस्तता में भी इन तीन तों के माध्यम से मधुर संबंध बनाकर रख सकते हैं जिससे हम कम समय देकर भी उनके साथ एक मधुर संबंध स्थापित कर सकते हैं।

अंत में बृजेंद्र कृष्ण ने बताया कि अगर हम प्रसन्नता चाहते हैं तो उसका एक सूत्र है- प्रसन्नता संसाधनइच्छाएं संतुष्टि प्रदर्शन,  आकांक्षाएं इस माध्यम से अपना विषय रखा।

                कार्यक्रम में मुख्य भूमिका के रूप में आईएएस अंशुल गुप्ता जी रहे पूरे वर्कशॉप सरकारी अधिकारियों ने भाग लिया व अपने जीवन में तनाव प्रबंधन के कई महत्वपूर्ण सूत्र प्राप्त किए व सभी ने अपनी कृतज्ञता

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