चिकित्सा प्रबंधन के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाना समय की मांग : *आलोक संजर
- कोविड ने परिस्थितियों से जूझना सिखाया, अब समग्र स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की जरूरत : डॉ लता
भोपाल
पूर्व सांसद भोपाल आलोक संजर ने कहा है कि चिकित्सा प्रबंधन के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाना समय की मांग है। श्री संजर नेहरू नगर स्थिति मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद में विंध्या शिक्षा एवं प्रचार समिति द्वारा समग्र स्वास्थ्य देखभाल पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला को सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में भोज विश्व विद्यालय के कुलपति संजय तिवारी और मप्र विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान के महानिदेशक अनिल कोठारी उपस्थित थे।
कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए श्री संजर ने कहा कि स्वस्थ र
हते हुए ही मनुष्य निजी और सार्वजनिक हर तरह के कार्य कर पाता है, यह सबको मालूम है। परंतु इसका महत्व तभी समझ में आता है जब जीवन में व्यवधान का सामना करना पड़ता है। तब हम स्वास्थ्य को लेकर सचेत हो जाते हैं। कोविड महामारी के दौर में यह बात सबने अनुभव की । कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए महानिदेशक मप्र साइंस एंड टेक्नोलॉजी संस्थान अनिल कोठारी ने कहा कि स्वास्थ्य और अस्वास्थ्य की उलझन नई नहीं है और स्वास्थ्य रक्षा के उपायों को लेकर प्रत्येक समाज उपचार या चिकित्सा के समाधान ढूंढता रहा है। इसके लिए मप्र साइंस एंड टेक्नोलॉजी संस्थान ने कोविड समय में बहुत महत्वपूर्ण कार्य किए हैं।इस तथ्य के बावजूद कि ऐतिहासिक रूप से विभिन्न ज्ञान परम्पराओं और भिन्न-भिन्न सांस्कृतिक संदर्भों में पनपने वाली विभिन्न उपचार प्रणालियों का सुदीर्घ काल से समानांतर अस्तित्व रहा है, आज वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपनाने वाली जैव चिकित्सा या एलोपैथी का उपयोग प्रमुखता से स्वीकृत और प्रधान हो चुकी है। यह स्थिति चिकित्सकीय ज्ञान की वास्तविकता को खंडित रूप से देखती और प्रस्तुत करती है। श्री आलोक जी ने कहा कि समग्र स्वास्थ्य की दृष्टि से देखभाल करने में व्यक्ति या जन-केंद्रित देखभाल प्रणाली शामिल होती है जो मन, शरीर और आत्मा को संबोधित करने वाली तरकीबों को भलीभांति एकीकृत करती है। संपूर्ण व्यक्ति और भागीदारी इसमें प्रमुख नियामक होते हैं।
योग और प्रकृति की गोद ही हमें स्वस्थ रखेगी :डॉ लता
कार्यशाला की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए कार्यक्रम की आयोजिका एवं विंध्या शिक्षा एवं प्रचार समिति की अध्यक्ष डॉ आर एच लता ने कहा कि आज हमारा देश वोकल फार लोकल से प्रारंभ होकर जी-20 पर पहुंच गया है। यह गर्व करने का मौका हमे हमारे देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री ने दिया है। हर विषय को विश्व पटल पर सम्मान से रखने का कार्य उन्होंने किया जिसमें योग और स्वास्थ्य सेवाएं भी हैं। आज हम पुनः सब स्वास्थ्य की चिंता को लेकर यहां एकत्रित हुए हैं। वह भी होलेस्टिक हेल्थ केयर को लेकर। क्या है होलेस्टिक हेल्थ केयर। एक तन मन से स्वस्थ शरीर, पर कहना नहीं चाहिए, वास्तविकता यह है कि मनुष्य सर्वाधिक स्वार्थी प्रजाति होती है । ईश्वर ने प्रकृति का, जीव जंतुओं का निर्माण किया, इसके बाद सब कुछ मनुष्य निर्मित है । हर एक संकट के समय इंसान हाथ फैलाए ईश्वर की शरण में पहुंच जाता है, लेकिन हम उसकी बनाई प्रकृति की रक्षा नहीं कर सकते। स्वस्थ शरीर की रक्षा नहीं कर सकते , विकास के नाम पर विनाश की लीला खेलते रहते . मशीनों पर आधारित जीवन , कृत्रिम भोजन एवं भौतिक सुखों से युक्त जीवनशैली जीने लगे हैं। लेकिन जो कुछ कोरोनावायरस ने दुनिया को दिखाया है उसके बाद अब फिर से लोगों को प्रकृति की याद आने लगी है। डॉ लता ने कहा कि केक, बर्गर, पिज्जा, कोल्डड्रिंक, शराब, मांस इत्यादि से शरीर को बीमारियों का अड्डा बना लेने के बाद अब हम इम्युनिटी के लिए आमला, गिलोय, हल्दी, काढ़ा, ऑक्सीजन के लिए प्राणायाम याद करने लगे हैं। सचमुच मनुष्य अवसरवादी होता है। उन्होंने कहा कि जब तक इसके स्तर पर बदलाव नहीं होंगे शरीर की इम्युनिटी कभी काम नहीं कर। वर्तमान समय में हुए बदलाव को क्षणिक नहीं दीर्घकालिक बनाएँ यदि हम एक एक स्वस्थ शरीर के साथ एक स्वस्थ समाज में रहना चाहते हैं। डॉ लता ने कहा कि ईश्वर मंदिर की भव्यता से नहीं हमारे चरित्र की भव्यता एवं उदात्तता से प्रसन्न होते हैं। अब समय है जमीन से जुड़कर जमीनी होकर रहने का। हमें यह सब कुछ सिखाया इस कोविड महामारी ने। उस समय आजो अनुभव आए, उसके हर किसी को एक नई दिशा दी, हमने भी सीखा कि कैसे इन परिस्थितियों से गुजरा जाता है, एक नया शोध और चिंतन का विषय बना यह काल। डॉ लता ने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य भी यही है कि हम ऐसी स्थिति में एक व्यवस्था बनाए, ऐसे कार्यकर्ता तैयार करे जो संपूर्ण रुप प्रशिक्षित हो और जरूरत पर किसी को भी संबल प्रदान कर सकें।
कोविड के दौरान कार्य से मिली प्रेरणा :
डॉ लता ने कहा कि मैं सर्वप्रथम आहवान करती हूं उन घरेलू बहनों को जो सिर्फ गृहणी है। वह ऐसे प्रशिक्षण वो जरुर प्राप्त करें। स्वयं का ख्याल रखें साथ ही अपने समाज का भी। समाज से मतलब भीड़ नहीं, वह हमारे पड़ोसी, हमारे परिचित हो सकते हैं। हमारी संस्था के द्वारा कोविड समय में जो कार्य किए गए, उससे ही यह प्रेरणा मिली कि देश को ऐसे होलेस्टिक हेल्थ केयर टेकर की श्रंखला तैयार करने की बहुत आवश्यकता है और यह कार्य विंध्य शिक्षा प्रचार समिति करने को तत्पर है। हमें सिर्फ आपके सहयोग और समर्थन की आवश्यकता है। हमारी संस्था द्वारा एक और कार्यक्रम तीन सालों से निशुल्क एडुजीलाइफ चलाया जा रहा है। जिसमें सुश्री सोनिया दुबे दीवान बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं और इसको सक्रिय रूप से सुश्री दीपा तिवारी बालिकाओं तक पहुंचा रही है।
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