
तीस वर्षीय संतोष यादव और उनकी पत्नी रानी यादव ने कभी सोचा नहीं था कि उनकी चार पीढि़यों का खुद के पक्के घर का सपना पूरा हो जाएगा। लेकिन सरकार ने संतोष और उनकी पत्नी रानी यादव के सालों से संजोए अपने खुद के घर के सपने को प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत बनाए गए शानदार पक्के मकान की सौगात देकर साकार कर दिया।
रानी यादव वर्षों पहले ब्याह कर अनूपपुर जिले के अकुआ गांव में आई थीं और तब से अपने पति संतोष के साथ कच्ची खपरैल में रहती आई थीं। उनके पति दिहाड़ी मजदूर थे। इसलिए दिहाड़ी मजदूर रहते हुए वर्षों निकाल दिए। पर पक्का मकान नहीं बना पाए। संतोष के परदादे करीब दो सौ साल पहले खाने कमाने के लिए मैहर से रोजगार की तलाष में अनूपपुर जिले के अकुआ गांव में आकर बस गए थे और फिर यहीं के होकर रह गए थे। शुरु में सिर छुपाने को आसमान के नीचे झोपड़ी डाल ली थी। दिहाड़ी मजदूर रहते हुए वर्षों निकाल दिए और पक्के मकान का सपना लिए एक दिन वह चल बसे।
संतोष भी अपने पूर्वजों की तरह कच्चे खपरैलनुमा मकान में रह रहे थे। बरसात में रहना मुश्किल हो जाता था। वह और उनकी पत्नी चाहते थे कि उनके पास स्वयं का पक्का मकान हो, जहां उनके परिवार को बरसात में पानी गिरने और सर्दी में ठंडी हवा का खौफ ना हो। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास के लिए अधिकारियों से संपर्क किया, ताकि अपने घर का सपना साकार हो सके।
आखिरकार संतोष और रानी के खुद के घर के सपने को प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में पक्का मकान बनवाकर साकार कर दिया गया। जब संतोष का पक्का मकान बन गया तो उनका और रानी की खुशी का ठिकाना ना रहा। अब उनको बरसात में अपने घर में भींगने की चिंता नहीं रही। अब वह घर में आराम से रह रहे हैं। पक्के मकान की खुशी जताते हुए रानी कहती हैं कि सरकार ने असंभव से लगने वाले उनके पक्के मकान के सपने को साकार कर दिया है। जिला पंचायत के परियोजना अधिकारी प्रधानमंत्री आवास योजना डॉ. उमेश द्विवेदी ने बताया कि जिले के ग्रामीण अंचल में बड़ी संख्या में जरूरतमंद परिवारों को प्रधानमंत्री आवास बनवाए जा रहे हैं।
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