| बालाघाट | 15-सितम्बर-2020 |
चंगोला बोमर्डे का भी सपना था कि शहरों की तरह उसका भी अपना सीमेंट कांक्रीट की छत वाला पक्का मकान हो। लेकिन धन की कमी के कारण वह पक्का मकान नहीं बना पा रही थी। उसे अपने परिवार के साथ मिट्टी के कच्चे मकान में रहना पड़ता था। चंगोला बताती है कि लगभग 35 वर्षो से उसका परिवार मिट्टी के कच्चे मकान में रह रहा था। बारिश के दिनों में कच्चे मकान की छत टपकने और मिट्टी की दिवार गिली हो जाया करती थी। जिससे दिवार गिरने का डर हमेशा बना रहता था । परिवार को हर मौसम में अलग अलग समस्याओं से जूझना पडता था। विशेषकर बरसात के दिनों में जीवन पर सकंट बना रहता था। लेकिन अब उसे मकान की दिवार गिरने या छत टपकने की चिंता नहीं रहेगी। चंगोला बोमर्डे ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना से मुझे मेरा घर तो मिला ही और साथ ही घर बनाने की मजदूरी भी मिली । इस योजना का लाभ लेकर पूरे परिवार ने मेहनत की है और छोटा सा पक्का मकान बना लिया है। यदि शासन की योजना का लाभ नहीं मिलता तो उसके परिवार को कच्चे मकान में ही रहना पड़ता। |
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