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आजादी के 73 वर्ष बाद भी विकास को तरसते म.प्र.के कस्बे


 पुलिया, टीन शेड के अभाव में आदिवासी का हुआ अंतिम संस्कार


कमर तक पानी में से ले गए अर्थी, बरसते पानी में खुले में  हुआ अंतिम संस्कार

चिता जलाने में आई परेशानी

 गंज बासौदा

, आजादी के 73 वर्ष बाद भी विदिशा जिले के कस्बे की यह हालत है  सरकार ढिंढोरे पीटती है 


विकास हुआ कहां हुआ वंया कर रहा
है 

तहसील से 17 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पुरातत्व नगरी उदयपुर में प्राचीन नील कंठेश्वर महादेव मंदिर स्थित है जहां दूर दूर से भक्त महादेव के दर्शन करने आते है और इसी उदयपुर पंचायत के मजरा टोला कहे जाने वाले पहाड़ी ग्राम खोंगंरा 


में राकेश आदिवासी की मृत्यु हो जाने पर कमर तक भरे नाले में से ग्रामीणों ने अर्थी निकाली और बरसते पानी में बड़ी मुश्किल से टीन शैड के अभाव में अंतिम संस्कार किया। इससे पहले इसी तहसील के ग्राम पंचायत महागौर में भी टीन शेड के अभाव में ग्रामीणों ने चद्दर के अंतिम संस्कार किया था। आदिवासी बाहुल्य इस ग्राम की

आवादी 300 के आसपास है। उदयपुर से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस ग्राम के लोग सड़क, पानी, बिजली आदि बुनियादी सुविधाओं से बंचित है। एवं इनको स्वास्थ्य, शिक्षा या अन्य कार्य के लिए पहाड़ी और नाले को पार करना पड़ता है। ग्रामवासियों ने बताया कि टीन शैड के अभाव में अंतिम संस्कार करने के लिए वर्षा काल में बारिश थमने तक का इंतजार करना पड़ता है। ग्राम पंचायत के सचिव कोमल प्रसाद विश्वकर्मा ने बताया कि वन ग्राम होने के कारण पंचायत द्वारा कोई प्रयास नहीं किया जाता। इस संबंध में जनपद सीईओ ने की मानें तो   सैड का निर्माण क्यों नहीं हो पाया इसकी जानकारी नहीं है मेरा स्वास्थ्य ठीक नहीं है घर पर हूं। ऑफिस जाते ही बताएंगे

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