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मध्य प्रदेश विधानसभा में पेश 2026-27 बजट,विकास, वादे और विपक्ष के सवाल

*मध्य प्रदेश विधानसभा में पेश 2026-27 का ऐतिहासिक बजट* 

*विकास, वादे और विपक्ष के सवाल*

18 फरवरी 2026 को भोपाल स्थित मध्य प्रदेश विधानसभा में वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत किया। यह मोहन यादव सरकार का तीसरा बजट है और जगदीश देवड़ा द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत किया गया छठा बजट। बजट का आकार विभिन्न स्रोतों के अनुसार 4.38 लाख करोड़ रुपये से लेकर 4.65-4.70 लाख करोड़ रुपये तक बताया जा रहा है, जिसे राज्य के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा बजट माना जा रहा है। विशेष बात यह रही कि बजट पूरी तरह पेपरलेस तरीके से टैबलेट पर प्रस्तुत किया गया और इसमें कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया।

*बजट का व्यापक परिप्रेक्ष्य*

यह बजट केवल वार्षिक आय-व्यय का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि सरकार की विकास दृष्टि का दस्तावेज भी है। सरकार ने इसे “रोलिंग बजट” की अवधारणा पर आधारित बताया है, यानी यह केवल एक वर्ष की योजना नहीं बल्कि आगामी दो वर्षों की रणनीतिक रूपरेखा भी प्रस्तुत करता है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे विकसित मध्य प्रदेश की दिशा में निर्णायक कदम बताया और कहा कि यह 30 प्रतिशत की विकास दर के लक्ष्य पर आधारित है।

सरकार ने अपने भाषण में चार प्रमुख वर्गों गरीब, महिला, युवा और किसान को केंद्र में रखा। इन वर्गों के लिए अलग-अलग योजनाओं और बजटीय प्रावधानों की घोषणा की गई, जिससे स्पष्ट है कि सामाजिक और आर्थिक संतुलन साधने की कोशिश की गई है।

*किसानों के लिए बड़ा पैकेज*

कृषि प्रधान राज्य होने के कारण मध्य प्रदेश के बजट में किसानों पर विशेष ध्यान दिया गया है। किसानों के लिए कुल 1.57 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार ने 1 लाख सोलर पंप लगाने की योजना की घोषणा की है, जिसके लिए 3000 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। इसका उद्देश्य किसानों की बिजली पर निर्भरता कम करना, सिंचाई की लागत घटाना और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देना है।

इसके साथ ही फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स को बढ़ावा देने और कृषि उत्पादों का वैल्यू एडिशन बढ़ाने की दिशा में कदम उठाने की बात कही गई है। राज्य को “मिल्क कैपिटल” बनाने का लक्ष्य भी सामने रखा गया है, जिससे डेयरी उद्योग को नई गति मिल सकती है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

*महिलाओं के लिए ‘लाड़ली बहना’ का विस्तार*

महिला सशक्तिकरण को ध्यान में रखते हुए लाड़ली बहना योजना के लिए 23,882 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह योजना पहले से ही राज्य की प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में शामिल है और लाखों महिलाओं को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता देती है। सरकार का दावा है कि इससे महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता और पारिवारिक निर्णयों में भागीदारी बढ़ी है।
इसके अलावा महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण महिला उद्यमिता को भी प्रोत्साहन देने के संकेत दिए गए हैं। सामाजिक कल्याण की दृष्टि से यह बजट महिला वर्ग को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

*शिक्षा और बच्चों के पोषण पर फोकस*

बजट में शिक्षा और बाल पोषण को भी प्राथमिकता दी गई है। आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को मिड-डे मील योजना के तहत टेट्रा पैक में मुफ्त दूध देने की घोषणा की गई है। इसका उद्देश्य बच्चों में कुपोषण को कम करना और पोषण स्तर सुधारना है।

साथ ही 15,000 शिक्षकों की भर्ती की घोषणा की गई है। इससे सरकारी स्कूलों में शिक्षक-छात्र अनुपात सुधरने की उम्मीद है। शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार, डिजिटल संसाधनों का विस्तार और ग्रामीण क्षेत्रों में अधोसंरचना सुधार की दिशा में भी संकेत दिए गए हैं।

*युवाओं के लिए रोजगार अवसर*

सरकार ने कुल 50,000 सरकारी नौकरियों का लक्ष्य घोषित किया है। इसमें पुलिस विभाग में 22,500 पदों) पर भर्ती और आंगनबाड़ी में 19,000 पदों पर नियुक्ति शामिल है। अन्य विभागों में भी रिक्त पदों को भरने की योजना है।

मुख्यमंत्री ने “हर हाथ को काम” देने का संकल्प दोहराया और कहा कि राज्य में औद्योगिक निवेश बढ़ाकर निजी क्षेत्र में भी रोजगार सृजन किया जाएगा। बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए विशेष औद्योगिक पैकेज की घोषणा इसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है।

*सिंहस्थ 2028 और अधोसंरचना विकास*

सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के लिए 3,060 करोड़ रुपये से लेकर 13,851 करोड़ रुपये तक के प्रावधान का उल्लेख किया गया है। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि पर्यटन और अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है।

स्वास्थ्य सेवाओं और ग्रामीण अधोसंरचना पर विशेष ध्यान देने की बात भी कही गई है। 11,000 नए आवास निर्माण का लक्ष्य रखा गया है, जिससे गरीब और निम्न आय वर्ग को राहत मिल सकती है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बजट को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह मध्य प्रदेश को विकसित राज्य बनाने की दिशा में ठोस कदम है। उन्होंने इसे संतुलित, समावेशी और भविष्य उन्मुख बजट बताया। उनका कहना है कि बिना नया टैक्स लगाए इतना बड़ा बजट पेश करना सरकार की वित्तीय प्रबंधन क्षमता को दर्शाता है।

सरकार का दावा है कि यह बजट सामाजिक सुरक्षा, अधोसंरचना विकास और आर्थिक वृद्धि के बीच संतुलन स्थापित करता है।

वहीं विपक्ष ने बजट को लेकर तीखा हमला बोला है। कमल नाथ और जितू पाटवारी ने इसे कर्ज आधारित और अवास्तविक बताया। उनका आरोप है कि केंद्र से 50,000 करोड़ रुपये कम मिलने के कारण पिछले बजट का 50 प्रतिशत भी खर्च नहीं हो सका।

विपक्ष ने राज्य पर बढ़ते कर्ज और ब्याज भुगतान के बोझ पर सवाल उठाए। आरोप लगाया गया कि सरकार रोजाना लगभग 213 करोड़ रुपये का कर्ज ले रही है। महंगाई और रसोई गैस की कीमतों को लेकर “रसोई संसद” और गुल्लक लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया गया।

बजट विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के पंचायत और निकाय चुनावों को देखते हुए यह बजट सामाजिक वर्गों को साधने की कोशिश है। किसान, महिला और युवा वर्ग पर विशेष फोकस चुनावी दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हालांकि सरकार इसे दीर्घकालिक विकास योजना का हिस्सा बता रही है। रोलिंग बजट की अवधारणा, औद्योगिक पैकेज और अधोसंरचना निवेश को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

मध्य प्रदेश का वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट आकार, घोषणाओं और राजनीतिक बहस के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। एक ओर सरकार इसे विकास की नई इबारत लिखने वाला बजट बता रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे कर्ज के जाल में फंसाने वाला दस्तावेज कह रहा है।

अब असली चुनौती इसके प्रभावी क्रियान्वयन और वित्तीय अनुशासन की होगी। यदि घोषित योजनाएं समय पर और पारदर्शिता के साथ लागू होती हैं, तो यह बजट राज्य की अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना को नई दिशा दे सकता है। लेकिन यदि वित्तीय संतुलन और संसाधन प्रबंधन में कमी रही, तो विपक्ष के आरोप भी राजनीतिक बहस का केंद्र बने रहेंगे।

आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि यह बजट वास्तव में मध्य प्रदेश को विकास के नए शिखर पर ले जाता है या फिर राजनीतिक वादों और आरोप-प्रत्यारोप के बीच सीमित रह जाता है।

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